Wednesday, July 6, 2011

Ping Pong Pigs

एक बार एक मोहल्ले में पिंग-पोंग नाम के दो पिग्गू   (Pigs) रहते थे. वो दोनों सुबह से शाम तक इधर-उधर घूमते फिरते रहते थे. जब उनको भूख लगती थी तो वो पार्क के किनारे रखे trash -bin पे जा के कुछ खा लिया करते थे. उसी मोहल्ले में एक दिन एक Boxer नाम का डॉगी (Dog) आया. डॉगी ने जैसे ही दोनों पिग्गु को टहलते हुए देखा, वो उन के पीछे भगा.  पिंग पोंग ने जैसे  ही डॉगी को अपनी तरफ आते देखा, दोनों अपने घर की तरफ भाग गए.
अगले दिन फिर से पिंग पोंग जैसे ही पार्क के पास पहुचे डॉगी ने फिर से उनको भगा दिया. फिर तो ये रोज़ का काम हो गया. दोनों पिग्गू   बड़े परेशान  हो गए. उन लोगो की समझ नहीं आ रहा था की वो लोग डॉगी को कैसे समझाएं. अगले दिन से वो दोनों सुबह-सुबह जल्दी से आ जाते थे और trash -bin  में जो भी थोडा बहुत मिलता था वो खा के काम चलाने लगे. लेकिन जैसे ही Boxer दिखता था, पिंग-पोंग भाग जाते थे. एक दिन परेशान हो के दोनों ने decide किया की ऐसे काम नहीं चलेगा, कुछ तो करना पड़ेगा. उस दिन  शाम को जब Boxer घर गया  तो पिंग पोंग ने उसका  पीछा किया. उन्होंने देखा की Boxer के घर में उसकी एक मम्मी रहती है.
अगले दिन जब Boxer घर से निकला तो पिंग पोंग उसकी मम्मी के सामने जा के खड़े हो गए. Boxer की मम्मी ने पुछा "क्या बात है बेटा?" तो पिंग पोंग  ने सारा किस्सा सुना दिया. और जोर जोर से रोने लग गए. Boxer की मम्मी ने उनको समझाया और कहा कि वो Boxer से बात करेगी. उस दिन शाम को जब Boxer घर वापस  आया तो उसने देखा कि उसकी मम्मी चुपचाप एक कोने में बैठी है. Boxer ने पूछा "क्या हुआ मम्मी? तुम इतनी चुपचाप क्यों बैठी हो?" तो मम्मी ने बोला "क्या बताऊ बेटा, मै जिस पार्क में रोज़ जाती हूँ, आजकल वहां एक घोडा आने लग गया है. वो मुझे पार्क में जाने ही नहीं देता. इतना बड़ा पार्क है लेकिन वो मुझे एक कोने में भी नहीं बैठने देता. मुझे दिन भर कुछ खाने को भी नहीं मिल पाता. भूख से मै कमज़ोर हो रही हूँ. ये सुन के Boxer  को गुस्सा आ गया. Boxer बोला, "घोड़े को तुमसे क्या प्रोब्लेम है? तुम तो उसकी घास भी नहीं खाती हो. फिर वो तुम्हे क्यों परेशान कर रहा है? ये तो गलत बात है". ये सुन के Boxer कि मम्मी मुस्कुराने लगी. Boxer confuse हो गया. उसने मम्मी से पूछा "तुम क्यों हँस रही हो?" मम्मी ने बोला "बेटा जो काम घोडा मेरे साथ करता है वोही तो तुम पिंग पोंग के साथ करते हो. तो तुम भी तो गलत करते हो." ये सुन के Boxer चुप हो गया. उसे अपनी गलती का एहसास हुआ. उसने मम्मी से प्रोमिस किया कि आगे से वो किसी भी जानवर को परेशां नहीं करेगा.

Sunday, April 18, 2010

दोस्ती

एक बार एक खरगोश और कछुए में बड़ी गहरी दोस्ती थी वो दोनो रोज़ सुबह उठ कर जंगल में खेलने निकल जाया करते थे खरगोश पूरे जंगल से फूल, पत्तियां, फल और सब्जियां चुन कर लाता था और फिर दोनों मिल कर खाया करते थे फिर शाम होने तक दोनों लोग खेलते थे और फिर घर चले जाया करते थे धीरे धीरे कुछ दिन बाद खरगोश को लगने लगा कि कछुआ तो कुछ करता ही नहीं है बस एक जगह बैठा रहता है खरगोश दौड़ दौड़ के खाने पीने का सामान लाता है एक दिन खरगोश ने कछुए से कहा "यार कछुए हमेशा मई ही दौड़ भाग करता रहता हूँ, तुम तो कुछ नहीं करते " कछुआ बोला, "खरगोश भैया मई तो धीरे धीरे ही चल पाता हूँ " खरगोश ने कहा ,"मै कुछ नहीं जानता, अगर तुम्हे मुझसे दोस्ती बना के रखनी है तो तुम भी कुछ किया करो और अगर कल से तुम खाना-पीना नहीं ला सकते तो हमारी दोस्ती ख़तम " कछुए ने खरगोश को समझाने कि कोशिश करी लेकिन खरगोश नहीं माना कछुआ कुछ नहीं बोला उसे पाता था कि खरगोश को अपनी फुर्ती पे घमंड हो गया है
अगले दिन से उन लोगो ने साथ में खेलना बंद कर दिया खरगोश ने एक लोमड़ी से दोस्ती कर ली. लोमड़ी भी खरगोश कि तरह तेज़ भाग सकती थी अब खरगोश कछुए को भूल भी गया कुछ दिन बाद लोमड़ी जंगल में जा रही थी तभी शेर ने उसे रोका शेर बोला "अरे लोमड़ी, आज कल कहाँ रहती हो? दिखाई नहीं पड़ती" लोमड़ी बोली "अरे महाराज, मै अपने नए दोस्त खरगोश के साथ खेलती रहती हूँ शेर ने खरगोश का नाम सुना तो बोला, "मैंने सुना है खरगोश खाने में बड़ा टेस्टी होता है वो खरगोश तो तुम्हारा दोस्त है ना, एक दिन मेरी गुफा तक ले आओ उसे" लोमड़ी बोली, "महाराज वो मेरा दोस्त है " तो शेर बोला, "अगर तुमने मुझे खरगोश ला के दिया तो मै तुम्हे हमेशा अपने शिकार में से हिस्सा दिया करूंगा" लोमड़ी तो चालाक होती है, उसे लगा कि ये तो बढ़िया है हमेशा के लिए बैठे बैठे खाना मिलेगा

अगले दिन उसने खरगोश को नदी के किनारे बुलाया लोमड़ी ने कहा कि मै ४ बजे आ जाउंगी, तुम नदी के किनारे पत्थर पे बैठे रहना खरगोश मान गया लोमड़ी ने शेर को भी बता दिया कि ४ बजे खरगोश नदी के किनारे बैठा मिलेगा खरगोश ठीक ४ बजे नदी के किनारे आ के पत्थर पर बैठ गया थोड़ी देर तक उसने लोमड़ी का इंतजार किया, जब लोमड़ी नहीं आई तो उसने मुद के देखा तो उसके पीछे शेर खड़ा था खरगोश डर गया वो वहां से भागने की तरकीब सोचने लगा लेकिन उसके एक तरफ नदी थी और दूसरी तरफ शेर उसने डर के आँखें बंद कर ली उसे लोमड़ी से दोस्ती पे पछतावा हो रहा था उसे लग रहा था की शेर एक मिनट में उसे खा जायेगा लेकिन अचानक से उसे लगा की वो जिस पत्थर पे बैठा है वो पत्थर हिल रहा है उसने आँखें खोल के देखा तो वो नदी के बीच में था उसे विश्वास नहीं हुआ उसने ध्यान से देखा तो जिस पत्थर पे वो बैठा था वो पत्थर नहीं उसका पुराना दोस्त कछुआ था कछुआ ने तैर के पूरी नदी पास कर ली, और इस तरह से खरगोश की जान बच गयी खरगोश ने कछुए से माफ़ी मांग ली उसके बाद से दोनों फिर से दोस्त हो गए

Thursday, June 25, 2009

Puppy aur Pinky

एक मोहल्ले में एक डौगी रहता था उसका नाम पप्पी था. पप्पी बड़ा सीधा सादा था. किसी को तंग नहीं करता था. अपने आप में खुश रहता था. बचपन से ही वो अकेला था अकेला ही बड़ा हुआ था और बड़ा हो कर भी अकेला ही रहता था. रोज़ सुबह सुबह उठ जाता था और पूरे मोहल्ले का चक्कर मारता था अगर उसे कुछ भी नया दिखता था तो जोर जोर से भौकता था इस तरह से वो पूरे मोहल्ले की रखवाली करता था कोई भी कार उस गली में आती थी तो उस कार का पीछा करता था और उसे रोड के दुसरे एंड तक दौडाता था एक दिन उस मोहल्ले में एक female dog पिंकी आई. मोहल्ले के सारे कुत्ते उस के चक्कर काटने लग गए. पप्पी भी उनके साथ जाकर खडा हो गया. सब उसे देख रहे थे, कोई पास नहीं जा रहा था. लेकिन पप्पी उसके पास गया और उसका नाम पूछा और थोडी ही देर में दोनों की दोस्ती हो गयी पिंकी और पप्पी रोज़ साथ में घूमने लगे. जब भी कोई कार उस गल्ली से गुज़रती तो दोनों उसका पीछा करते थे. और उनमे से जो हर जाता था वो दोनों के लिए खाना ढूंढ के लाता था मोहल्ले के बाकी कुत्तों को पप्पी और पिंकी की दोस्ती बिलकुल अच्छी नहीं लगती थी एक दिन पप्पी रेस हार गया और दूसरी गली में खाना ढूँढने गया तो पीछे से बाकी कुत्तों ने उसपे हमला कर दिया पप्पी अकेले उनसे लड़ता रहा लेकिन थोडी देर बाद थक के गिर पड़ा उसे घायल करके बाकी कुत्ते वहां से चले गए थोडी देर बाद पप्पी ने देखा की पिंकी उसे ढूंढती हुयी पीछे पीछे वहां तक आ गयी थी पिंकी ने जैसे ही पप्पी को गिरा हुआ देखा तुंरत उसके पास आके खड़ी हो गई पिंकी ने जब देखा की पप्पी की चोट लगी है तो पिंकी रोने लगी ये देख के पप्पी को बड़ा आश्चर्य हुआ आज तक कभी किसी ने उसका इतना ख्याल नहीं किया था, उसकी इतनी फिकर नहीं करी थी. पप्पी को पहली बार लगा की कोई उसे प्यार करता है. उसे भी पिंकी से प्यार हो गया. फिर दोनों शादी करके ख़ुशी ख़ुशी रहने लगे.